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Be Aware


Being a customer-centric organization, Dogma Soft Limited keeps the safety of its customers at the top of the list. We take care that our customers experience the most seamless fintech services without compromising their financial safety. Therefore, we do educate all our franchisees and customers to cope with Online Fintech Frauds in India

Online Fintech Fraud

Online fraud is defined as the act of committing illegal financial activities by fraudsters in order to steal the money of a victim. And when these frauds take place in the fintech field, theyare called online fintech frauds. To protect the franchisees from this alarming rise of online fintech frauds in India, Dogma aims to spread awareness among the franchisees.

KYC Fraud:

KYC stands for “Know Your Customer”. Collecting the KYC details of people by defrauding them and misusing these details is collectively called KYC fraud. Sharing the KYC details with any unauthorized person may leave you financially vulnerable.

While processing the KYC process with Dogma Soft Limited, make sure to cross-verify the below points.

1. Always check the phone number before giving any key details on any telephonic conversation. Dogma Soft Limited’s KYC officers always call you from Dogma Registered mobile numbers.
2. Cross-verify your RM’s name before proceeding with the KYC process.
3. Always check the web address and make sure that you are using the official and authorized website of Dogma Soft Limited i.e. https://dogmaindia.com/ (Main Website) or https://dogmasoft.in/dogmalogin (Retailer Panel)

OTP Fraud

The full form of the term OTP is One Time Password. OTPs are meant to only be in your knowledge and shouldn’t be shared with any unauthorized person or agency. You might face severe repercussions by sharing your OTP with any unauthorized person or agency. To abstain from this online fintech fraud in India from happening, kindly confirm the following points while performing any process with Dogma Soft Limited.

• You are dealing with the authorized person of Dogma Soft Limited.
• Share the OTP only with the name of Dogma Soft Limited in your message list.
• Verify your RM’s name before proceeding with any process.


SMS has become one of the perfect ways to communicate today, but it has become a subject of concern as fraudsters may harm your finances. SMS fraud, or SMS phishing, is the act of defrauding people with messages that contain some fraudulent URLs which have been made to swindle you. Oftentimes, these URLs look exactly like the actual web pages that are being copied. It is one of the most used Online Fintech Frauds in India
Here are some tips to cope with this fraud.
• While visiting Dogma Soft Limited’s Website/Panel/Application Keep the following points in your mind.
• Validate that you are using the authentic URL and Webpage of Dogma Soft i.e. https://dogmaindia.com/ (Main Website) or https://dogmasoft.in/dogmalogin (Retailer Panel)
• Never click on any URL/link that seems to be suspicious or fishy.

Offline Fintech Frauds

Fraudsters may also defraud you offline. Offline fintech frauds in India are the same as online fintech frauds, but scammers do swindle you personally without leveraging the technology.

Commission Fraud

In the fintech business, commission plays a vital part in your earnings. However, fraudsters haven’t left this aspect of business too, to swindle you. Some of the fraudsters open a temporary company and lure consumers with the promise of huge commissions, and when people purchase a franchisee, these fraudsters disappear, along with their non-permanent companies.
To be guarded against these types of unauthorized companies, one should perform the following activities.
• Don’t get easily convinced by the newcomer companies that offer huge commissions and promising opportunities.
• Perform a background check on these companies and their owners.
• Keep an eye on their existence
• Try to collect as much information about these companies as you can.
• Verify the official websites of these companies.

Business Whereabouts Fraud

Business location plays an important part in a venture. However, some fraudsters may cheat you by letting you visit a fake office or business location to make you rely on them. It is an act of offline fintech frauds in India. Once you start relying on them, they will defraud you. To get yourself safe from this fraud, perform the following tips.

• Always cross-check the details with the neighborhood of the location.
• Check the existence of the location on Google Maps and other online tools.
• Verify the address with the details given on the website.
Do only rely on and deal with the company after verifying the above details.

Though all these precautions may take a little of your time, it will save you from the possible offline/online fintech frauds in India and intents of conmen. Dogma focuses to provide a seamless fintech experience to each of its franchisee and customers.


नकलचियों से सावधान, अच्छे भविष्य के लिए नक़ल की नहीं अक़्ल की जरुरत है, इसलिए चोरी करके किसी की मेहनत का श्रेय ना लें!

All Intellectual Properties such as Copyright, Trademarks, and Trade Secrets of Dogma Soft Limited are registered under Business class of Trademark and IP Act of India hence are the sole properties of Dogma Soft Limited.

All the rights are reserved for Dogma Soft Limited only and the usage of all intellectual properties and Visual Creatives (such as Images, Posts, Brochures, Posters, Banners, Videos and Infographics etc.) are prohibited without our permission and deemed as illegal & unethical. Strict legal proceedings shall be initiated against any unauthorized use.

Be Aware form these type of messages. Don't click any unknown links

"Dear customer your SBI Credit Card point worth Rs 2897 expired by 22/07/2018. Kindly convert your points into cash by click here http://xyzzzfrfdf.com".

Please Note - Dogma Soft द्वारा ये जानकारी आपकी अपनी सावधानि के लिए दी जा रही है जिससे आप साइबर क्राइम जैसे दुर्घटनाओं से अपने आपको काफी हद तक सुरक्षित कर सकते है। यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की साइबर क्राइम जैसी घटना घटित होती है तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन या अपने नजदीकी स्टेशन पर संपर्क करे। Dogma Soft आपके साथ हुए हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।

साइबर क्राइम से सावधान

मिस्ड कॉल आने के बाद व्यापारी 1.86 करोड़ कैसे खो सकता है? क्या है सिम कार्ड घोटाला? यह घटना क्यू और कैसे हुई जानने के लिए पूरा पढे.।।

OTP के बिना ट्रांसेक्शन हो नही सकता (अंतर्राष्ट्रीय डेबिट/क्रेडिट कार्ड द्वारा की गयी लेन देन को छोड़कर). पर इस घटना में किसी कार्ड से लेनदेन नही हुआ था बल्कि उस व्यापारी के खाते से अलग अलग खातों में ट्रांसफर किया गया था और ट्रांसफर के लिए भी OTP जरूरी है। तो सवाल उठता है OPT इन ठगों को मिला कैसे जबकि सिम कार्ड व्यापारी के पास था? और उस व्यापारी ने OTP किसी को नही बताया था। बताएगा भी कैसे क्योंकि उसके मोबाइल में OTP आया ही नही था।

जवाब यह है की इन ठगों ने SIM Swap की थी।

SIM Swap क्या होता है?

सिम स्वाप मतलब अगर आपको अपने पुराने सिम कार्ड को बदलकर उसी नंबर से नया कार्ड लेना हो तो इस प्रक्रिया को सिम स्वाप कहते है।
सिम स्वाप एक सामान्य प्रक्रिया है जिसकी जरूरत मोबाईल धारकों को कभी न कभी पड़ती ही है जैसे -

1. जब आपका मोबाईल चोरी या गुम हो जाता है तब उसी नंबर की दूसरी सिम लेने के लिए।
2. जब सिम कार्ड टूट फुट या कट कर खराब हो जाता है।
3. जब एक सर्विस प्रवाइडर से दूसरे सर्विस प्रवाइडर मे port करना चाहते है। उदाहरण के लिए एयरटेल से जिओ या जिओ से एयरटेल।

पर ठग इसी सिम स्वाप का गलत फायदा उठा सकते है । इसमे किसी व्यक्ति को टारगेट किया जाता है और उसकी तमाम निजी जानकारिया जुटाई जाती है फिर इस जानकारी की सहायता से उपउक्त व्यक्ति के सिम कार्ड को बंद करवा कर अपने पास स्थित एक खाली सिम मे उस नंबर को चालू करवा लिया जाता है।

सिम स्वाप के लिए ठगों ने उस व्यापारी के मोबाइल को हैक करके तमाम निजी जानकारी जैसे नाम पता, आधार कार्ड, ID नंबर, बैंकिंग जानकारिया इत्यादि जान ली थी। पर किसी का भी फ़ोन ऐसे ही हैक नही हो जाता। उस व्यापारी ने कभी किसी इनसिक्योर (असुरक्षित) वेबसाइट, संक्रमित ऍप, SMS या ईमेल के संक्रमित लिंक या फिसिंग वेबसाइट पर गए होंगे और अपनी बैंकिंग व अन्य डिटेल्स डाल दी होगी। जिससे तमाम निजी एवं गुप्त जानकारी ठगों के पास पहुच गयी होगी। सारी जानकारी के बाद ठगों को सिर्फ OTP की जरूरत थी उसके लिए उन्होंने सिम स्वापिंग का सहारा लिया।

ये सब जानकारी जब ठगों के हाथ मे आ जाती है तो वे कस्टमर केयर को उस नंबर का मालिक बनकर फोन लगते है। यहाँ काम आती है तमाम निजी जानकारी जो ठगों ने जुटाई थी। इन निजी जानकारियों को लेकर ठग कस्टमर केयर वालों को यह विश्वास दिला देते है की इस नंबर का मालिक ही फोन कर रहा है और उसका मोबाईल गुम हो गया है । इसलिए वे पुराने सिम को बंद कर देते है और ठगों के पास जो खाली सिम रहता है उसे उसी नंबर से चालू कर देते है।

अब नंबर खुद ठगों के पास आ जाता है तो वे आसानी से OTP प्राप्त कर ठगी को अंजाम देते है। पीड़ित को ठगी होने का पता तब चलता है जब वह अपना मोबाईल देखता है। चूंकि उसका सिम बंद हो चुका होता है इसलिए मोबाईल मे नेटवर्क नहीं आएगा। नेटवर्क नहीं आता देखकर भी आदमी इसे नेटवर्क की खराबी समझकर कुछ समय ऐसे ही जाने देता है। जब तक कारण पता लगता है तब तक देर हो चुकी होती है।

सिम स्वैप करने के बाद ठग उस व्यापारी के नंबर पर बार बार इसलिए कॉल कर रहे थे ताकि ये कन्फर्म हो जाए की उस व्यापारी के पास जो सिम है वह बंद हुआ की नही और ठगों के पास जो उसी नंबर का सिम था वह चालू हुआ या नही। क्योंकि मोबाइल नेटवर्क में कभी भी 1 नंबर के 2 सिम एकसाथ चालू नही रह सकते।

कैसे बचे सिम स्वाप फ्रॉड से?

1. हमेशा नेट बैंकिंग अपने खुदके मोबाईल/कंप्युटर मे करे। नेट कैफै के कंप्युटर मे ना करें।
2. गलती से भी पब्लिक वाईफाई जैसे रैलवे स्टेशन, बस स्टैन्ड, पब्लिक वाईफाई हॉटस्पॉट, बिना पासवर्ड के वाईफाई आदि मे नेट बैंकिंग का उपयोग नहीं करना।
3. बैंक या किसी भी वेबसाईट के URL (वेबसाईट का अड्रेस) मे “https” जरूर होना चाहिए। अगर सिर्फ “http” है ( p के बाद s नहीं है) तो इन वेबसाईट मे ना जाएं। क्यूंकी ये वेबसाईट Encrypted नहीं होती और आप जो भी डिटेल्स वेबसाईट मे डालते है उसे हैकर आसानी से देख सकता है।
4. बैंक के वेबसाईट का URL सही से डाले कोई स्पेलिंग मिस्टैक ना हो। क्यूंकी मिलते जुलते या स्पेलिंग मिस्टैक वाले URL फिसिंग वेबसाईट हो सकते है। फिसिंग वेबसाईट किसी मूल वेबसाईट जैसे किसी बैंक की वेबसाईट की हूबहू नकल होती है। इसमे जाने पर आपको लगेगा की आप अपने बैंक की वेबसाईट पर है पर यह नकली वेबसाईट होती है और इसमे आपके लॉगिन आइडी पासवर्ड डालते ही यह इस नकली वेबसाईट के मालिक के पास चल जाता है।
5. URL type करके ही डाले। किसी SMS, ईमेल या अन्य वेबसाईट मे दिए गए URL पे क्लिक करके बैंक के वेबसाईट मे ना जाए।
6. अपने मोबाईल मे प्ले स्टोर से ही एप डाउनलोड करे किसी अन्य वेबसाईट से ना करे। और कंप्युटर मे Cracked, Moded सॉफ्टवेयर इंस्टॉल ना करे।
7. मोबाईल और कंप्युटर मे Antivirus इंस्टॉल करे।
8. जहां जरूरी ना हो उस वेबसाईट मे निजी जानकारी ना दे।
9. निजी जानकारी वाले ID Card जैसे आधार कार्ड आदि की फोटोकापी कराते समय सुनिश्चित करे की फोटोकापी दुकान मे ना छोड़े।
10. अपना फेसबूक, इंस्टाग्राम, आदि की प्रोफाइल पब्लिक ना रखे और किसी अनजान को फ्रेंड नहीं बनाए।
11. अपना मोबाईल नंबर पब्लिक प्लेस मे शेयर ना करे इसे छुपा कर रखे।
12. 2 स्टेप वेरीफिकेशन का उपयोग करें जैसे गूगल Authenticator।
13. सिम कार्ड मे लिखा हुआ नंबर किसी को ना बताएं।
14. बैंक ट्रैन्सैक्शन अलर्ट के लिए SMS के साथ साथ ईमेल अलर्ट भी रखे।
15. OTP कभी भी किसी को ना बताएं। फोन पर बैंक मैनेजर बनकर आपकी निजी जानकारी जैसे आधार, नाम, पता, डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV, अकाउंट नंबर, आइडी पासवर्ड, OTP आदि मांगने वालों से दूर रहे। फोनपर बैंक कभी भी कोई भी निजी जानकारी नहीं मांगते।
16. मोबाईल मे नेटवर्क ज्यादा देर तक गायब रहे तो सर्विस प्रवाइडर को फोन कर सुनिश्चित करें क्या समस्या है। अगर किसी ने सिम स्वाप की रीक्वेस्ट की होगी तो सही समय मे पता लगने पर नंबर ब्लॉक करा कर फ्रॉड से बच सकते है।


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